What is GST in Hindi: जानिये GST क्या है सम्पूर्ण हिंदी में-2020
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What is GST in Hindi: जानिये GST क्या है सम्पूर्ण हिंदी में-2020

What is GST in Hindi: Complete Guide

What is GST in Hindi-One Nation One Market One tax
What is GST in Hindi-One Nation One Market One tax

 

What is the Meaning of GST in Hindi? (GST kya Hai?)

GST का सम्पूर्ण अर्थ होता है Goods एंड Services Tax (वस्तु एवं सेवा कर)- किसी भी प्रकार की “वस्तु या सेवा को खरीदने पर लगने वाले Tax (कर) को GST कहते हैं!

आज हम इस पुरे लेख में GST को हिंदी में बड़े ही आसान भाषा में समझेंगे और यह article आपके लिए A to Z GST Guide का काम करेगी!

जैसा की हम सभी लोग जानते है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक 5 Trillion Dollars Economy बनने जा रही है, इसी प्रकार अर्थव्यस्था को गति देने के लिए एक सरल Tax reform की आवश्यकता थी,
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और “एक देश, एक बाजार, एक कर” सोच के चलते GST को 1st जुलाई 2017 से पुरे भारत में लागू कर दिया गया!

Page Contents

GST काम कैसे करता है ? -How does GST Works?

जब भी आप कोई वस्तु या सेवा को ख़रीदते है तब जीएसटी  एक Indirect Tax (अप्रत्यक्ष कर)है जो कि VAT, CST, Luxary Tax, Entertainment Tax, Exise Duty इत्यादि को सम्मिलित कर के बनाया गया है!

इस Tax का राजस्व केंद्रीय तथा राज्य सरकार दोनों को जाता है, CGST केंद्र सरकार राजस्व में जमा होता है और SGST राज्य सरकार के राजस्व में जमा होता है!

जब किसी एक ही राज्य (Intra-State) में जब क्रय विक्रय किया जाता है तो CGST और SGST लागु होता है, लेकिन यही क्रय विक्रय अन्तर्राज्जीय (Inter State) में किया जाता है तो इसे IGST कहा जाता है! और IGST केंद्र सरकार द्वारा संग्रहण किया जाता है!

अब हम एक साधारण उदाहरण से इसे आसान भाषा में:

जब आप कोई उत्पाद खरीदते है या किसी सेवा का उपभोग करते है तो आपको मिलने वाले Invoice या बिल में जीएसटी कितना चुकाया गया उसका विवरण दिया जाता है!

जैसे आप राज्य में कोई उत्पाद खरीद रहे है और वह उत्पाद उस राज्य में बिकने के लिए बना है तब आप बिल में देखंगे:

CGST @ 9% of Value X

SGST @ 9% of Value X

Total is Value of X is = X + CGST @ 9% + SGST @ 9% (Total GST Paid 18%)

यदि उस वस्तु का मूल्य 100 रूपए है तो:

वस्तु का मूल्य = 100 /-

(+) CGST @ 9% = 9/- 

(+) SGST @ 9% = 9/-

कुल देय  मूल्य =100 + 9 + 9 = 118/- रूपए 

अब यदि आप इस वस्तु के अंतिम उपभोगक्ता नहीं हैं, और जब आप इस X वास्तु को दुबारा अपना मुनाफा जोड़कर बेचेंगे तब आपको केवल आपके द्वारा जोड़े गए मुनाफे पर ही जीएसटी जोड़ना होगा!

मान  लीजिये आपने 118/- रूपए देने के बाद उस वास्तु को 130/- रुपए में बेचा तो आप को GST केवल मुनाफे के 12/- (130/- -118/-) पर ही लेना होगा!

तब,

12/- का 9% CGST = 1.80/-

(+)

12/- का 9% SGST =  1.80/-

कुल मूल्य जो अंतिम उपभोक्ता को देना होगा वह होगा: 118 + 1.5 + 1.5= 121/- रूपए

GST Bill का भारत में इतिहास – History of GST Bill in India

  • Year: 2011-2013

जीएसटी एक ही दिन में बन कर लागू नहीं हुआ है, यह प्रक्रिया 16 वर्षों (तत्कालीन वजपेयी सरकार) से कार्यान्वित थी!
वर्ष 2011 में 115 वे संविधान संशोधन में इस बिल पर बहुमत मिल गया होता तो यह सन 2011 में ही लागू हो जाता!
लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और वर्ष 2013 में लोकसभा भंग हो गयी!

जीएसटी Bill को पूर्ण समर्थन न मिलने के कारण यह Bill पास नहीं हो पाया और हमें 6 वर्षो तक और इंतज़ार करना पड़ा!

  • Year: 2014-2016

दुबारा नयी सरकार बनने पर इस बिल को दिसंबर 2014 में 122 वे संविधान संशोधन में पेश किया गया और मई 2015 में लोकसभा द्वारा पास कर दिया गया और इसे राज्य सभा में भेजा गया जहा इसे अगस्त 2016 में पास कर दिया गया!

  • Year: 2017

अंत में GST समिति ने

  1. Central Goods and Services Tax Bill 2017 (CGST Bill),
  2. Integrated Goods and Services Tax Bill 2017 (IGST Bill),
  3. Union Territory Goods and Services Tax Bill 2017 (UTGST Bill), Goods and Services Tax (Compensation to the States) Bill 2017 को स्वीकृत कर दिया!

ये सभी बिल लोकसभा में मार्च 2017 और राज्य सभा में अप्रेल 2017 में पास कर दिए गए!

GST भारत में कब लागू हुआ?

1 जुलाई 2017 की मध्य रात्रि से श्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन राष्ठ्रपति श्री प्रणब मुखर्जी की सेंट्रल हॉल में उपस्थिति में पुरे भारतवर्ष में लागु कर दिया गया!

“17 साल और 4 सरकारें बदलने के बाद GST भारत में लागू हो पाया!”

GST के उद्देश्य – Objectives of GST

  • एक देश – एक कर : One Nation- One Tax:
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जीएसटी लागू होने से पहले आपको अलग अलग tax देने होते थे, जैसे VAT, CST, Luxary Tax, Entertainment Tax, Exise Duty.
इस तरह आपको 5 अलग अलग तरह के tax भरने होते थे! जीएसटी ने इन सभी 5 Taxes को हटा दिया गया जिससे Tax Calculation बहुत ही आसन हो गयी और अलग-अलग समय पर अलग-अलग टैक्स भरने के जगह एक ही tax भुगतान रह गया!

  • सोपानी प्रभाव: Cascading Effect: (Tax पर भी Tax)

जब भी आप किसी वास्तु को खरीदते है तो आपको कुल मूल्य पर टैक्स देना होता था, उस कुल मूल्य में पहले से ही Tax जुड़ा रहता था तब आपको Tax पर भी Tax देना होता था जिसे Cascading Effect या Tax on Tax भी कहा जाता है!
लेकिन जीएसटी में वस्तु की क़ीमत + विक्रेता का मारजीन + जी.एस.टी. ही देना होता है, यहाँ पर ध्यान देने वाली बात ये है की GST का कैलकुलेशन सिर्फ विक्रेता के मारजिन पर ही होगी न की वस्तु की पूरी कीमत पर!

GST केवल Value Addition (Margin) पर ही लागु किया जाता है!

  • आपूर्ति श्रृंखला में तेज गति: Faster Supply Chain:

जीएसटी लागू होने से पहले हर विभिन्न प्रकार के Tax देने होते थे, ये सभी tax राज्य की सीमा में जाने पर या पहुंचने से पहले भरने होते थे, किसी भी प्रकार के कागज़ी गैर अनुपालन की कमी से माल की आवजाहक में देरी हो जाती थी!
जीएसटी से सभी प्रकार के लेनदेन और Online हो गए और नियम में सरलता की वजह से किसी प्रकार के अनुपालन में कोई कठिनाई नहीं रह गयी, इस से Supply chain और भी fast हो गयी!

  • छोटे व्यापारियों (20 लाख से कम कारोबार) को GST से मुक्ति: Traders having turnover Less then 20 Lacs are exempted from GST:

वो व्यापारी जिनका एक साल का कारोबार 20 लाख से कम है उन्हें जीएसटी से मुक्त रखा गया है, लेकिन उन्हें अपने बिल के साथ स्वः घोषित पत्र (Self Declaration Letter) देना होता है जिसमे वे ये घोषणा करते है की उनका कारोबार एक साल में 20 लाख से कम का व्यापर करता है!

  • भ्रस्टाचार में कमी: Less Corruption:

Tax से बचने के लिए कई व्यापारी बिना बिल के व्यापार किया करते थे, या बिल में कम मूल्य दिखा कर जिससे सरकार और कभी कभी व्यापारी दोनों को नुक्सान पहुँचता था!
यहाँ सरकार को उचित कर नहीं मिल पाता था और व्यापारी को माल के चोरी होने पर या लेनदेन में लागत मूल्य न वसूलने का risk रहता था!
लेकिन जीएसटी में व्यापारी को कर में छूट मिलने, सरल गणना और साथ ही सरल GST Return Policy की वजह से भ्रस्टाचार में कमी हुई है!

  • ऑनलाइन सेवा और पारदर्शिता: Online Services and Transparency:

जीएसटी में आप सभी transactions ऑनलाइन देख सकते है. Tax Filing और Return भी ऑनलाइन कर सकते है, जिससे की व्यापार में पारदर्शिता सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है!
यही नहीं आप किसी और के जीएसटी नंबर की जांच भी ऑनलाइन कर सकते है, जिससे फर्जी व्यापर से बचा जा सकता है!

  • एक टैक्स: एक प्रतिफल- One Tax: One Tax Return:

पहले आपको अलग अलग टैक्स जैसे VAT, Exise Duty, Service Tax अलग अलग समय अवधि में भरने होते थे जैसे मासिक, त्रेमासिक अर्धवार्षिक और वार्षिक, इसी वजह से इन्हे सही से याद रखना और समय पर भरना एक तनाव भरा काम था!

लेकिन GST में आपको सब कुछ online File करना होता है! आप महीने में 2 बार और वर्ष के अंत में 1 बार Tax Retrun को File करते है!
इसमें मुख्य रूप से GSTR -1 होता है जिसमे आप सभी जानकारी खुद ही डालते है, और ये जानकारी डालते ही GSTR-3 स्वतः ही सिस्टम द्वारा बन जाता है!

GSTR -1 को आप अगले महीने की 11 तारीख को File करते है और सिस्टम द्वारा उसी महीने की 20 तारीख को GSTR -3 स्वतः ही बन जाता है, इस प्रकार आप महीने में 2 बार GST retrun file करते हैं!
लेकिन जिनका वार्षिक कारोबार 1.5 करोड़ रूपए से कम है वो इसे त्रेमासिक रूप से file कर सकते हैं, कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक होने पर उन्हें मासिक रूप से Return फाइल करना होगा!

GST Rules और Returns के प्रकार : Types of GST Returns and Rules:

Types of GST Returns in India
Types of GST Returns in India
  • GSTR -1 : वो सभी व्यापर जो की GST में रजिस्टर्ड है उन सभी को अनिवार्य रूप से इसे file करना ही है, भले ही उस महीने या उस त्रिमास में कोई लेनदेन हुआ हो या न हुआ हो! इसे अगले महीने की 11 तारीख को भरना होता है, अगर त्रेमासिक लेन देन है तो अक्टूबर – दिसंबर तक का विवरण 31 जनवरी तक तथा जनवरी-मार्च का विवरण 30 अप्रैल तक देना होता है!

यहाँ पर TAX प्रभावी वस्तु या सेवाओं का विवरण दिया जाता है
यदि समय पर विवरण न दिया गया तो आपको 200 /- प्रतिदिन के हिसाब से penalty देनी होती है!

  • GSTR-3B: GSTR-3B एक फॉर्मेट है जिसमे आपको माल के आवक (जो आपने ख़रीदा है) और माल की जावक (जो आपने बेचा है) के मूल्य का विवरण देना होता है! यहाँ आपको बिल नंबर नहीं, सिर्फ मूल्य को दर्शाना होता है!

यहाँ आपको Reversible, Occuring और exempted transactions तीनो का विवरण देना होता है!
इस फॉर्मेट को आप यहाँ से download कर सकते है!
यह कुछ इस तरह से दिखता है:

GSTR-3B Format
GSTR-3B Format
  • GSTR-4: वो सारे डीलर्स जो जिनहोने Composition Scheme को अपनाया है उन्हें ही GSTR -4 को फाइल करना होता है! कम्पोजीशन स्कीम के अंदर आने वाले सभी को 1 प्रकार का return देना होता है जो की त्रेमासिक रूप से दिया जाता है!

हम आगे देखेंगे की Composition स्कीम क्या है और इसमें कोनसे डीलर्स रजिस्टर कर सकते है!

  • GSTR -5 : Non- resident (अनिवासी -जो भारत के निवासी नहीं है) जो की जीएसटी में पंजीकृत है उन्हें इस return को भरना होता है! इसे NR को अगले महीने की 20 तारीख को File करना होता है!
  • GSTR -6: ये रिटर्न वहीं फाइल करते है जो कि Input Service Distributor हैं, इस रिटर्न में ITC (Input Tax Credit) का विवरण दिया जाता है।
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हम आगे देखेंगे की Input Service Distributor और Input Tax Credit क्या होता है।
ये रिटर्न हर महीने देना होता है।

  • GSTR 7: ये रिटर्न उन लोगो (Individuals) द्वारा file किया जाता है जो कि GST के अंदर TDS भरना चाहते है। GST 7 के अंदर TdS कटौती, TDS दायित्व(Liability) जो बकाया है तथा TDS रिफंड का विवरण दिया जाता है।

यह महत्वपूर्ण इसीलिए है क्योंकि इससे TDS जो आप भर चुके है उसे आप Input Tax Credit के रूप में बचा सकते हैं।

  • GSTR 8: वे सारे E-Commerce ऑपरेटर जो कि जीएसटी में रजिस्टर्ड है और ऑनलाइन ट्रेडिंग करते है, उन्हें हर अगले महीने कि 10 तारीख को रिटर्न फाइल करना होता है।
  • GSTR- 9 & GSTR -9A : वार्षिक रूप से भरे जाने वाले Tax Return जो कि अगले हर वर्ष की 31 दिसंबर तक file किए जाते है। इसमें GSTR 9 एक आम Tax Payer तथा GSTR 9A Composition Scheme में आने वाले Tax Payer को फाइल करना होता है।

ये एक Consolidated Tax रिटर्न होता है जिसमें GSTR 1 तथा GSTR 3B का विवरण होता है।

  • GSTR 10: वो व्यक्ति या संस्था जो कि अपना GST रजिस्ट्रीकरण cancel करवाना चाहते है या जिनका रजिस्ट्रीकरण cancel हो गया है उन्हें GSTR 10 को फाइल करना होता है। ये return उन्हें Date ऑफ Cancellation के तीन महीने के अंदर अंदर करवाना अनिवार्य होता है।
  • GSTR 11: ये रिटर्न उन्हें फाइल करना होता है जिन्हे UIN (Unique Identification Number) मिला हुआ है। इसमें उन्हें माल या सेवा के आवक या खरीदी का विवरण देना होता है।

GST के अंतर्गत कम्पोज़िशन स्कीम क्या है?-What is Composition Scheme Under GST?

वह करदाता जिनका वार्षिक कारोबार 1.5 रूपए के अंदर-अंदर है, वो सभी करदाता ऐच्छिक रूप से इस स्कीम का लाभ उठा सकते है! यह स्कीम उन कारोबारियों के लिए बनायीं गयी है जो की GST के अंदर आने वाले सारे रिटर्न्स न भरकर सीधे सीधे एक Fix Rate पर Tax को File करना चाहते है!

कम्पोज़िशन स्कीम के अंदर करदाता को सिर्फ एक GSTR फाइल करना होता है, जिसे GSTR 9 या GSTR 9A कहा जाता है, GST no के रेजिस्टरीकरण के दौरान इस स्कीम के बारे करदाता से पूछा जाता है की यदि वह इस स्कीम के अंतर्गत अपने आप को रजिस्टर करना चाहते है!

यदि कोई करदाता कम्पोजीशन स्कीम के अंदर रजिस्टर होते है तो उन्हें अपने वार्षिक कारोबार (Yearly Turnover) का एक fix अंश (Percentage) जो की 0 .5 % से 5% होता है वही टैक्स के रूप में जमा करवाना होता है!

इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या होता है? What is Input Tax Credit in GST?

Input Tax Credit को समझना बहुत आसान है और हम इसे एक उदाहरण से समझेंगे!
Input Tax Credit या Input Credit को समझने के लिए हमे पहले Input और Output को समझना होगा, किसी भी कारोबार में जो की GST पंजीकृत है वो सभी कारोबार वास्तु या सेवा का आदान- प्रदान करते है!

जैसे आपने कोई उत्पाद बनाने के लिए यदि कच्चा माल ख़रीदा है तो वो आपके लिए Input होगा, और वह माल खरीदते समय आपने उस पर GST भी दिया होगा, अब आप जब उस कच्चे मॉल से कोई उत्पाद तैयार कर के किसी को बेचते है तब वह बेचना आपके लिए Output होगा!

यहाँ जब आप कच्चा माल खरीदते समय ही (Input) GST दे चुके है तो माल बेचते समय(Output) में से वही Tax का मूल्य घटा (Deduct) कर दिया जायेगा!

GST = Tax Paid at Output – Tax Paid at Input

इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर क्या होता है? Who is Input Service Distributor in GST?

जब किसी व्यवसाय में एक से अधिक शाखाएं होती है और उन सभी शाखाओं पर किसी तरह की सेवा को ख़रीदा जाता है तब उन सेवाओं पर पर लगने वाले GST को समानुपात में बाँटना Input Service Distributor का काम होता है!

हम इसे एक उदाहरण से समझेंगे, मान लेते है की आप एक X कंपनी के मालिक है, यह X कंपनी राजस्थान में है, लेकिन इस कंपनी की शाखाएं गुजरात, मध्यप्रदेश और हरियाणा में है और इन शाखाओं में उत्पादन होता है!

यदि आप तीनो शखाओं में श्रमिकों की भर्ती के लिए इन तीनो राज्यों के अखबारों में विज्ञापन देते है तो आपको इन तीनो विज्ञापनों के खर्चे पर GST भी देना होगा! चूकि ये तीनो उत्पाद शाखाएं उनके अपने अपने राज्य में GST पंजीकृत होंगी, और उनका अपना GSTIN होगा!
लेकिन विज्ञापन का बिल (Invoice) आपको आपके राजस्थान के ऑफिस में दिया जायेगा क्योकि आप वहा से इन्हे Operate कर रहे हैं, और वही आपका पंजीकृत कार्यालय है!

इसीलिए आपका ISD (Input Service Distributor) राजस्थान वाला ऑफिस होगा, जहा से आप GST फाइल करते समय उस विज्ञापन के खर्च का विवरण GSTR-6 में शाखाओं के GSTIN पर बाटेंगे!

Note : Input Service Distributor और Input Tax Credit दोनों एक दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं!

भारत में GST के प्रकार: Types Of GST In India-

जीएसटी के अन्तर्गत तीन श्रेणियां आती है। वो कुछ इस प्रकार है

  • CGST (Central Goods and Services Tax)– वो टैक्स को केंद्रीय रूप से लगाया जाता है, और जिसका भुगतान केंद्र सरकार को होता है उसे CGST कहा जाता है। इसे केंद्रीय वस्तु एवम सेवा कर कहा जाता है।

 

  • SGST (State Goods and Services Tax)– वो टैक्स जो किसी भी राज्य में राज्य स्तर पर लगा जाता है और राज्य सरकार को भुगतान किया जाता है उसे SGST कहा जाता है।

इसे राजकीय वस्तु एवं सेवा कर कहते हैं।

  • IGST ( Integrated Goods and Services Tax) – जब अंतरराज्यीय (Inter-State) क्रय विक्रय किया जाता है तब उस टैक्स को केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता है और इसे IGST या समन्वित वस्तु एवं सेवा कर कहा जाता है।

 

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GST में रजिस्टर करने के लिए जरूरी दस्तावेज: Required Documents to Register for GST

GST में register करने के लिए आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।

  1. व्यापार और व्यापारी (कर्ता) का PAN कार्ड। PAN card or Entity and Business Owner Issued by Income Tax Department of India.
  2. सक्रिय फोन नंबर(भारतीय) और सक्रिय E Mail जिस पर किसी भी प्रकार का संप्रेषण किया जा सके। (Active Phone number and a Valid E Mail address for Further Official Communication)
  3. स्थाई पता प्रमाण: Proof Of the Business Firm( Electricity Bill, Registration Certificate under any Municipal Council or Shops and Establishment Act)
  4. बैंक खाता विवरण और प्रमाण: Valid Bank Account details With Proof( Cancelled Cheque or Passbook with IFSC Code)
  5. प्रदान किए जाने वाली सेवाएं या उदपादो की सूची: List of Services or Products Offered for Trading.
  6. अधिकृत व्यक्ति दर्शाए जाने पर अधिकारिता का प्रमाण: Proof of Authorization (Form -ix)
  7. अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर और फोटो
  8. Digital Signature
  9. Incorporation Certificate ( यदि कम्पनी हो तो)

GST में Reverse Charge क्या होता है? What is Reverse Charge in GST?

जब किसी उत्पाद या सेवा प्रदाता (Goods Supplier) को जीएसटी न दे कर के उसी उत्पाद या सेवा का जीएसटी जब प्राप्तकर्ता (Goods Recipient) को देना पड़ता है इसे जीएसटी में Reverse Charge कहा जाता है!

आमतौर पर Supplier को जीएसटी देना होता है, लेकिन कुछ शर्ते पूरी न होने पर Receiver को जीएसटी देना पड़ता है, शर्तें कुछ इस प्रकार है:

  1. यदि Supplier का जीएसटी में पंजीकृत  नहीं है!
  2. यदि कोई सेवा किसी E-Commerce से खरीदी गयी है!
  3. CBIC द्वारा प्रकाशित लिस्ट में मौजूद उत्पाद!

 

GST पंजीकरण की वैधता किस तरह  से Online देखी जाती है?  How to Seach for GST Number Verification Online?

जो भी करदाता जीएसटी में पंजीकृत है उन्हें एक 15 संख्या का नंबर मिलता है जो पंजीकरण सफलता पूर्वक होने के बाद online ही दे दिया जाता है, ये नंबर अपने आप में ही भिन्न (unique)  होता है!

आप यहाँ  click कर के किसी भी GSTIN या UIN से वैधता अथवा नाम पंजीकरण देख सकते है:

How to Check Valid GST Number and Registration
How to Check Valid GST Number and Registration

 

GST में स्वयं को पंजीकृत कर GSTIN किस तरह से प्राप्त किया जाता है? How to Register for GST Online and get GSTIN?

जीएसटी के लिए registration करना बहुत ही आसान है, यह उतना ही आसान है जितना  Facebook, Instagram या LinkedIn पर खुद की Profile बनाना!

आपको अपने बारे में और अपनी Firm के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए, और कुछ documents जैसे PAN, AADHAR Card, Photos, Address Proof, Bank Details आदि आपके पास scan किये हुए होने चाहिए!

इन सभी documents को registration प्रक्रिया के दौरान विभिन्न चरणों में upload करना होता है

GSTIN तब मिलता है जब आपका जीएसटी Online Regsitration सफलतापूर्वक हो जाता है!

जीएसटी में पंजीकरण करने के लिए और GSTIN प्राप्त करने के लिए आपको यहाँ Click करना होगा या आप इसकी मुख्य website https://www.gst.gov.in/ पर भी जा सकते है!

GST Registration for GSTIN
GST Registration for GSTIN

 

पहले बॉक्स में आपको विभिन्न प्रकार के कर दाता के रूप में स्वयं को या संस्था को पंजीकृत करने के Option दिए जायेंगे जैसे:

  1. Tax Payer: कर दाता
  2. Tax Deductor : जो माल या सेवा आपूर्ति के लिए विक्रेता को भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है।
  3. Tax Collector-E Commerce – जो माल या सेवा आपूर्ति होने के बाद कर संग्रह करने के लिए जिम्मेदार है।
  4. GST Pratctioner – जीएसटी की व्यावसायिक सेवा देने वाला।
  5. Non Resident Taxable Person- अनिवासी जो  कर दाता है।
  6. United Nation Body: संयुक्त राष्ठ्र का कोई संगठन
  7. Consulate or Embassy of Foreign Country- दूतावास
  8. Other Notified Person: कोई अन्य विशेष व्यक्ति
  9. Non-Resident Online Service Provider: अनिवासी जो Online सेवा प्रदान करता है।
GST Registration Categories
GST Registration Categories

जब आप इसमें से किसी एक के रूप में  स्वयं को पंजीकृत करेंगे तब आपको आपके प्रदान किये गए e mail address तथा मोबाइल नंबर पर एक otp आएगा जिसे आप यहाँ प्रदान कर के अपनी वैधता का  प्रमाण देंगे।

OTP डालते ही आपको एक TRN नंबर मिलेगा जिसे Temporary Reference Number जाता है, यह नंबर आपको आपके email address पर मिलेगा जिससे आप प्रक्रिया के दूसरे चरण में पहुंच जायेंगे!

यहाँ आपको TRN नंबर  डाल कर आगे की प्रक्रिया को पूरा करना है:

GST Registration TRN
GST Registration TRN

GST में E-Way बिल क्या होता है और कैसे बनता है? What is E-Way Bill in GST and How it is made?

यदि आपके माल की कीमत 50000 रूपए से अधिक है और आप उसे  एक राज्य से दूसरे राज्य में Road Transport द्वारा लेकर जाते है, तो आपको E-Way बिल बनाना आवश्यक हो जाता है!

E-Way बिल बहुत  आसानी से बन जाता है, इसे Transporter या GST पंजीकृत व्यक्ति online बना सकते है! यदि आप जीएसटी पंजीकृत नहीं है और आम नागरिक है तो भी आप E-Way बिल बना सकते है!

यदि आप जीएसटी पंजीकृत नहीं है तो आपको E-Way बिल बनाने के लिए AADHAR और PAN की अव्यश्कता होगी!

How to Make E-Way Bill in GST
How to Make E-Way Bill in GST

 

E-Way बिल किस-किस तरीके से बनाया जा सकता है: Methods of Generating E-Way Bill.

  1. Online: आप ऑनलाइन पोर्टल  पर जाकर  बना सकते है! 
  2. SMS Service by Registered Mobile: अपने registered mobile  नंबर से SMS भेज कर बना सकते है! 
  3. Android App: Android Application के द्वारा भी बना सकते है!  

 

Akash Gurjar

Hi, I am Akash. I am Hobbyist Blogger and YouTube Creator. I like to explore and learn new things all the time. I own a website easyexplain.info and a YouTube Channel EasyExplain. Join Me.

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